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यस बैंक: बाजार का वो चहेता बैंक जो दूसरों को बनाने के चक्कर में खुद डूब रहा है

1 अक्टूबर 2019. शाम को शेयर बाजार बंद हुआ तो चारों तरफ एक ही चर्चा थी. क्या यस बैंक डूबने वाला है? 1 अक्टूबर को यस बैंक का शेयर अब तक के सबसे निचले स्तर 32 रुपए प्रति शेयर पर बंद हुआ. पिछले साल के मुकाबले देखें तो यस बैंक के शेयर में 90 फीसद की गिरावट दर्ज की गई. 20 अगस्त 2018 को यस बैंक के एक शेयर की कीमत 404 रुपए थी. यानी कि अगर पिछले साल 20 अगस्त को किसी ने एक लाख रुपए यस बैंक में लगाए होते तो आज उसका 90 फीसद पैसा डूब गया होता. एक अच्छा खासा बैंक, जिसे बाजार में औसत दर से ज्यादा ब्याज देने के लिए जाना जाता था. उसके इतने बुरे दिन आ गए कि उसके प्रमोटर ही अपनी हिस्सेदारी बेचने लगे. आखिर क्या हुआ ऐसा कि प्राइवेट सेक्टर के टॉप बैंकों में से एक बैंक के इतने बुरे दिन आ गए? हर किसी के मन में ये सवाल है.

यस बैंक के इतने बुरे दिन आए कैसे?

बैंक दो तरीके से प्रॉफिट कमाते हैं. एक, बड़े-बड़े कॉरपोरेट्स को बड़ा-बड़ा लोन देकर. दूसरा खुदरा ग्राहकों के जरिए. जैसे मान लीजिए आपने बैंक में अकाउंट खुलवाया. जमा किए एक हजार रुपए. आपकी ही तरह हजारों और लोगों ने अकाउंट खुलवाए और पैसे जमा किए. बैंक इन पैसों को लोन पर दे देते हैं. किसी तीसरे आदमी को. बैंक आपके जमा किए पैसे पर ब्याज देता है 5 प्रतिशत. और जिन्हें लोन दिया है उनसे लेता है 8 प्रतिशत. बीच में जो तीन प्रतिशत का हिस्सा बचता है वो बैंक का मुनाफा होता है. लेकिन कई बार ऐसा होता कि लोन लेने वाला व्यक्ति या कंपनी हाथ खड़े कर देता है. कहता है कि अब हम लोन नहीं चुका पाएंगे. ऐसे लोगों को कंपनी एनपीए घोषित कर देती है.
यस बैंक की मौजूदगी खुदरा ग्राहकों के बीच कम थी. कॉरपोरेट कंपनियों के बीच ज्यादा. यस बैंक ने जिन कंपनियों को लोन दिया अधिकतर घाटे में हैं. दिवालिया हो चुकी हैं या होने की कगार पर है. जब वे डूबने लगीं तो बैंक का हाल भी खस्ता होने लगा.
इसे ऐसे समझिए. मान लीजिए आप सड़क पर चल रहे हैं. सारे नियम कायदे फॉलो करते हुए. अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान है आपको. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप सड़क पर पूरी तरह सुरक्षित हैं. आपकी सुरक्षा सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों पर भी निर्भर करती है. अगर वे सही तरीके से नहीं चल रहे हैं तो इससे आपको भी दिक्कत होगी. आप एक्सीडेंट के शिकार भी हो सकते हैं. ठीक यही हुआ है यस बैंक के साथ. बैंक ने जिन कंपनियों को कर्ज दे रखा है उनकी हालत है खराब. इनमें एस्सेल ग्रुप, अंनिल अंबानी की ADAG, DHFL, और इंडियाबुल्स हाउसिंग कंपनी प्रमुख हैं. ये सारी कंपनियां हैं घाटे में. ये डगमगाईं तो सीधा असर पड़ा यस बैंक पर. यस बैंक की हालत खराब होनी शुरू हो गई. एक उदाहरण इंडियाबुल्स का लीजिए. यस बैंक के कुल नेटवर्थ का एक चौथाई इंडियाबुल्स समूह में फंसा हुआ है. पूरे 6040 करोड़ रुपए. यस बैंक का कुल नेटवर्थ करीब 27,000 करोड़ रुपए है. इंडियाबुल्स के सितारे इन दिनों गर्दिश में हैं. इंडियाबुल्स के प्रमोटर्स पर वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं. इस समूह पर बैंकों का करीब 27,580 करोड़ रुपया फंसा हुआ है. इंडियाबुल्स ने अगर डिफॉल्ट किया तो सबसे ज्यादा जोखिम यस बैंक के लिए ही है.

कंपनी के प्रमोटर्स ही बेचने लगे शेयर
2004 में राणा कपूर ने अपने रिश्तेदार अशोक कपूर के साथ मिलकर यस बैंक की शुरुआत की थी. 26/11 के मुंबई हमले में अशोक कपूर की मौत हो गई. जिसके बाद अशोक कपूर की पत्नी मधु कपूर और राणा कपूर के बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हुई. मधु अपनी बेटी शगुन को बैंक के बोर्ड में शामिल करना चाहती थीं. मामला बंबई हाईकोर्ट तक पहुंचा. 2011 में फैसला राणा कपूर के पक्ष में आया. ज्वैलर्स फैमिली से ताल्लुक रखने वाले राणा कपूर यस बैंक में अपने शेयर्स को हीरा-मोती बताते थे. जिसे वे कभी नहीं बेचने की बात कहते थे. लेकिन चीजें हमेशा आपकी सोच के हिसाब से ही नहीं होतीं. आज राणा कपूर अपने शेयर्स बेच रहे हैं.इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक  इस समय राणा कपूर और उनके ग्रुप की यस बैंक में हिस्सेदारी घटकर 4.72 फीसद रह गई है. 3 अक्टूबर को बैंक के सीनियर ग्रुप प्रेसिडेंट रजत मोंगा ने इस्तीफा दे दिया. वे 2004 से ही बैंक के साथ जुड़े थे. मोंगा ने 18 और 19 सितंबर को बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेची थी.

राणा कपूर
राणा कपूर का कहना था कि वे अपने शेयर कभी नहीं बेचेंगे.

एक के बाद एक झटके
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यस बैंक को पिछले कुछ समय में एक के बाद एक झटके लगे. शुरुआत तब हुई जब रिजर्व बैंक ने बैंक के चेयरमैन और को-फाउंडर राणा कपूर को उनके पद से हटा दिया. क्यों हटाया? कहा गया कि बैंक के कामकाज में कुछ ऐसा है जिसे छुपाया जा रहा है. रिजर्व बैंक को अंदेशा था कि यस बैंक की ओर से बैलेंस शीट में सही जानकारी नहीं दी जा रही है. आरबीआई ने 31 जनवरी तक राणा कपूर से पद छोड़ने को कहा था. राणा कपूर ने ही 2004 में अशोक कपूर के साथ मिलकर यस बैंक की शुरुआत की थी.
# इसके बाद रिजर्व बैंक ने यस बैंक पर एक करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया. मार्च 2019 में. कहा कि बैंक स्विफ्ट नियमों का पालन नहीं कर रहा है. स्विफ्ट एक मैसेजिंग सॉफ्टवेयर है. जिसका उपयोग वित्तीय संस्थाएं लेनदेन के लिए करती हैं. इसी मैसेजिंग सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग करके नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने पीएनबी में 14 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की थी.
अगला झटका यस बैंक को क्यूआईपी ने दिया. क्यूआईपी यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट. इसके जरिए कंपनियां अपने लिए पूंजी जुटाती हैं. यस बैंक ने क्यूआईपी के जरिए फंड इकट्ठा करने का जो लक्ष्य रखा था वहां तक पहुंच नहीं पाई. बैंक ने क्यूआईपी के जरिए 1,930 करोड़ रुपये जुटाए थे.
#अगस्त 2019 में मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने यस बैंक की रेटिंग घटा दी. इसके अलावा दुनिया भर की रेटिंग एजेंसियां यस बैंक को संदिग्ध नजर से देख रही हैं. ये एजेंसियां कंपनियों को उनके कामकाज के हिसाब से रेटिंग देती हैं. मूडीज ने यस बैंक को जंक वर्ग में डाल दिया. इसका मतलब ये होता है कंपनी में कुछ खराब हुआ तभी उसे डिग्रेड किया गया है. सबसे पहले आता है एएए, फिर एए फिर ए और फिर बीबीबी इसी तरह से डी आता है. डी का मतलब होता है जंक. अब यस बैंक जंक की कैटेगरी में आ चुका है.

80 हजार करोड़ से 8 करोड़ पर
यस बैंक का मार्केट कैप इस समय 8,161 करोड़ रुपये के आसपास चल रहा है. जबकि सितंबर 2018 में यस बैंक का मार्केट कैप करीब 80 हजार करोड़ रुपये था. यानी बैंक के मार्केट कैप में 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई है. पिछले साल अगस्त की तुलना में बैंक के शेयर में 90 फीसद की गिरावट आई है. अगस्त 2019 में आई ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक यस बैंक सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले दुनिया के 10 बैंकों की सूची में शामिल हो गया है. हालांकि इन 10 में से 7 बैंक भारत के ही हैं.

रवनीत गिल का मानना है कि चुनौतियां काफी कठिन हैं लेकिन बैंक इनसे उबर जाएगा.
रवनीत गिल का मानना है कि चुनौतियां काफी कठिन हैं लेकिन बैंक इनसे उबर जाएगा.

अब आगे क्या
यस बैंक संभालने की जिम्मेदारी अब रवनीत गिल के कंधों पर है. इकोनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में रवनीत कहते हैं कि हर कंपनी में एक ऐसा समय आता है जब चीजों को फिर से सेट करना पड़ता है. यस बैंक भी इसी दौर से गुजर रहा है. आज की स्थिति के लिए बाहर मार्केट में हो रही चीजें भी जिम्मेदार हैं. हमें थोड़ी स्टेबिलिटी दिखानी होगी.
रवनीत गिल कंपनी को वापस ढर्रे पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. इन्वेस्टर्स में भरोसा जगाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन जबतक कंपनी संभलने की थोड़ी बहुत स्थिति में आती है कोई न कोई नया मामला आ जाता है. जैसे हम दीवाली पर घर साफ करते हैं. घर का सारा कचरा निकाल कर बाहर रख देते हैं. कहते हैं देख लो भइया. इतना कचरा था हमारे यहां. अब हमारा घर एकदम साफ है. देख लो. कोई गड़बड़ी नहीं है. कंपनियां इस कचरा निकाली को किचन सिंकिंग कहती हैं. लेकिन तब तक कुछ नया आंधी तूफान आ जाता है और घर फिर गंदगी से भर जाता है. इसमें अफवाहों की भी भरपूर भूमिका है. जैसे पीएमसी बैंक पर आरबीआई ने कुछ प्रतिबंध लगाए. लोगों के बीच ये बात चलने लगी कि यस बैंक डूब रहा है. जैसे पीएमसी पर प्रतिबंध लगे हैं. वैसे ही यस बैंक पर भी लगने वाला है. भगदड़ मच गई. और शेयर हो गया धड़ाम.


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